मुक्केबाज़ी
नौ, छह, शून्य: पेरिस की बाउट शीट और भारतीय मुक्केबाजी का कभी न खुला प्रोटेस्ट खातापांच अगस्त 2026 की रात, हैदराबाद के अपने डेस्क पर मैंने नॉर्थ पेरिस एरेना की ...
छह मुक्केबाज़, शून्य पदक: भारतीय मुक्केबाज़ी का असली दफ़्तर रेलवे है, बीएफआई नहींनॉर्थ पेरिस एरिना की ऊपरी गैलरी से निशांत देव का क्वार्टर फ़ाइनल देखते हुए सब...
सरकारी नौकरी, साढ़े तीन मिनट और वह खामोशी: भारतीय मुक्केबाज़ी की कहानी मेडल के बाद शुरू होती हैनई दिल्ली, नवंबर 2026। केडी जाधव इनडोर हॉल में प्रेस ट्रिब्यून के करीब साठ...
पेरिस से लॉस एंजिल्स तक: मुक्केबाज़ी का वह फ़्रेम जो भारत का कोटा-रास्ता तय करेगा20 मार्च 2026, कोस्टा नवारिनो। ग्रीस के उस कॉन्फ़्रेंस हॉल में आईओसी का सत्र ...
पटियाला की वेतन-बही: बयालीस में से इकतीस, और वो वज़न जिसका कोई मालिक नहींपटियाला की वेतन-बही: बयालीस में से इकतीस, और वो वज़न जिसका कोई मालिक नहीं सुब...
फ्रेम 14: पेरिस की स्प्लिट हार, वेट-क्लास की उलझन और भारतीय मुक्केबाज़ी का अनदेखा स्कोरकार्डपेरिस ओलंपिक के पुरुष 71 किलो क्वार्टरफाइनल की फाइल मैंने चौथी बार खोली और चौ...
छह कोटे, शून्य तमगे: भारतीय मुक्केबाज़ी का असली हिसाब वेट कैटेगरी में लिखा जाता हैपेरिस 2026 की मुक्केबाज़ी एंट्री लिस्ट में भारत के नाम छह मुक्केबाज़ थे — दो...
मुक्केबाज़ी का दूसरा कैलेंडर: पदक नहीं, नौकरी और ट्रायल की तारीख़ तय करती है किसका मुक्का चलेगापेरिस में अगस्त 2026 की एक रात, 71 किलो का क्वार्टरफ़ाइनल ख़त्म होते ही निशां...
छह कोटे, शून्य तमगा: पेरिस 2026 को मुक्केबाज़ी की गिरावट नहीं, क्वालिफिकेशन-रूट की नाकामी पढ़िएपेरिस ओलंपिक के लिए भारत के छह कोटे चार अलग-अलग दरवाज़ों से आए थे। तीन...
पटियाला का रजिस्टर: वज़न वर्ग बदलते हैं, नौकरियाँ तय होती हैं, और पदक की कहानी सबसे बाद में आती हैपटियाला के एनआईएस परिसर में सुबह पाँच बजे की घंटी बजती है। मुक्केबाज़ी हॉल की...
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